श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण एवं संकटनाशन स्तुति
भक्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित विभिन्न हनुमान प्रार्थनाओं का तुलनात्मक एवं आध्यात्मिक महत्व।
१. श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa)
भाव: सहज भक्ति, स्तुति, ज्ञान, गुण और चरित्र का गायन।
नियम: अत्यंत सरल, कोई भी व्यक्ति, कभी भी, कहीं भी पाठ कर सकता है। इसमें कोई तीक्ष्ण शपथ या तांत्रिक मंत्र नहीं है।
२. श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan)
भाव: आर्त पुकार, संकट-निवारण, एवं श्री राम की शपथ द्वारा रक्षा की गुहार।
नियम: शुचिता, आसन, और दीपक के साथ सात्विक संकल्प आवश्यक है। अनुचित उद्देश्य हेतु इसका पाठ वर्जित है।
३. संकट मोचन हनुमानाष्टक (Hanumashtak)
भाव: आठ छंदों (मत्तगयन्द सवैया) में सुग्रीव, लक्ष्मण, सीता जी के संकट हरने की गाथा।
नियम: बाल-गोपाल और वृद्धजनों के लिए अत्यंत मधुर और सरल छंद।
४. सुंदरकांड (Shri Sundarkand)
भाव: श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान, हनुमान जी के समुद्र-लंघन और लंका-विजय का विस्तृत महाकाव्य।
नियम: सामूहिक पाठ, अखण्ड संकीर्तन, तथा शनिवार/मंगलवार संध्या को विशेष गायन।
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